क्या करूँ …?
कभी -कभी ,
दिल के दर्द का भारीपन …
जिन्दगी को
इस हद तक
दबाता है ,
मानो . . दर्द ,
जिन्दगी से बड़ा हो गया हो ,
और तब …. जिन्दगी ,
अपने अस्तित्व के लिए
मिटा देना चाहती ,
अपना ही अस्तित्व
कभी -कभी ,
दिल के दर्द का भारीपन …
जिन्दगी को
इस हद तक
दबाता है ,
मानो . . दर्द ,
जिन्दगी से बड़ा हो गया हो ,
और तब …. जिन्दगी ,
अपने अस्तित्व के लिए
मिटा देना चाहती ,
अपना ही अस्तित्व