एक आहटों का झोका कुछ आ रहा ऐसे
मंद -मंद तन पे वो छा रहा हो जैसे
उलझने अजीब सी घूम -घूम आती
मै दूर जाऊ उनसे वो पास से बुलाती
जल उर्मिकाओं जैसी देती है मन को ठोकर
दिल में रह जाता जैसे कुछ होकर
कुछ नीले पुष्प मुझको पास दिख रहे हैं
पर जाने क्यूँ कुछ कहने से डर रहे है
वो कौन जो मुझको यूँ सता रहा है
सामने तो आ जरा नज़रे तो मिला
गर दिल तेरा कुछ कह रहा है
कुछ कह रहा है ................
