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Saturday, August 24, 2013

कोशिश

बेफिक्र जिन्दगी के
झूठे पुलिन्दों से,
और कुछ लापरवाह
जिन्दगी की कड़वी सच्चाइयों से ,
बेतरतीब जवां उमंगे हैं दिल में ,
और शुष्क मुस्कान चेहरे पे लिए,
सोचा ना था कभी,
आओगे आप मेरे,
इस तरह और इतने करीब,
जो भी रहा जैसे भी रहा ,
आगाज़ इस रिश्ते का,
था बड़ा बेरुखा ,
पर कुछ मीठे,
मुलाकातों के साथ,
सिलसिला अब दोस्ती का ,
यूँ ही चलता रहे ,
चलता रहे...............
हर मुमकिन कोशिश ,
रहेगी हमारी, रहेगी हमारी ...............

" तन्हा दिल "


जाएं भी तो कहाँ.....
ना ही कोई मंज़िल
ना ही कोई रस्ता
जिस पर ऐसे ही 
चलती रहे ज़िंदगी|
ना ही कोई अपना
ना ही कोई पराया 
जिसे इस दर्द को करूं साझा|
ना ही कोई उम्मीद की किरण
ना ही कोई आखों में कोई ख़्वाब
जिसके लिये कुछ पल जियूँ|
कुछ है....तो बस!
ये तन्हा दिल
जो बार-बार करता है सवाल
खुद से...
जाएं भी तो कहाँ.......
जाएं भी तो कहाँ......

दर्द !

ये क्या आवारगी....लिख दी गयी हैबादलों की छत पर|  जब भी मेरा दिलउदास होता है, क़मबख्त बरस पड़ते हैं,मुझ पर ही..

Friday, June 7, 2013

आज तारीख ७ जून २० १ ३  हमारा अनुभव कुछ ऐसा बन रहा है जैसे नदी का दोनों  किनारा अपनी पानी के भयंकर प्रवाह से टूटने के कगार पे है और वो नदी कोई और नही बल्कि एक पागल लड़का है जो .........दो 

Thursday, December 27, 2012

क्या करूँ  …?
कभी -कभी ,
दिल के दर्द का  भारीपन  …
जिन्दगी  को 
इस  हद  तक  
दबाता है ,
मानो . . दर्द ,
जिन्दगी से बड़ा हो गया  हो ,
और तब …. जिन्दगी ,
अपने अस्तित्व के लिए 
मिटा देना चाहती ,
अपना  ही अस्तित्व 



Friday, August 24, 2012

"ग़ज़ल "



चाहतों का सिलसिला बड़े ,तो कुछ बात हो
दिलों की नजदीकियां बड़े, तो कुछ बात हो
खिलने लगी हैं उमंगे मन की गहराइयों में
पर उमंगे जवां हो ,तो कुछ बात हो
चाहतों का सिलसिला .........................
छुपे चेहरे की नजाकत को समझना मुश्किल
नज़रों से नजरों का दीदार हो ,तो कुछ बात हो
चाहतों का सिलसिला .............................

यूँ ही ख्यालों में सताना अच्छा नही
दिलों का तीर आर-पार हो, तो कुछ बात हो
चाहतों का सिलसिला .........................

"ग़ज़ल "

बेरुखी में इस तरह ना ठुकराओ मुझे
चाहतों का मोम हूँ , पिघलाओ मुझे
धडकनों में नज़र आयेगी तस्वीर तुम्हारी
अपने दिल का आइना, बनाओ मुझे
बेरुखी में इस .....................................
समंदर,अश्कों का बन जायेगा एक पल में
तह -ऐ -दिल से अपने, रुलाओ मुझे
बेरुखी में इस .................................
गर खता है मेरी तुझसे इश्क करना
रूह-ऐ-नूर से पूछकर, बताओ मुझे

बेरुखी में इस ......................................
गिरा लूगां खुद को खुद की नज़र में
नज़र से नज़र मिलाकर, दिखाओ मुझे
बेरुखी में इस ................................