prakritikiyadonme.blogspot.com

Saturday, August 24, 2013

कोशिश

बेफिक्र जिन्दगी के
झूठे पुलिन्दों से,
और कुछ लापरवाह
जिन्दगी की कड़वी सच्चाइयों से ,
बेतरतीब जवां उमंगे हैं दिल में ,
और शुष्क मुस्कान चेहरे पे लिए,
सोचा ना था कभी,
आओगे आप मेरे,
इस तरह और इतने करीब,
जो भी रहा जैसे भी रहा ,
आगाज़ इस रिश्ते का,
था बड़ा बेरुखा ,
पर कुछ मीठे,
मुलाकातों के साथ,
सिलसिला अब दोस्ती का ,
यूँ ही चलता रहे ,
चलता रहे...............
हर मुमकिन कोशिश ,
रहेगी हमारी, रहेगी हमारी ...............

" तन्हा दिल "


जाएं भी तो कहाँ.....
ना ही कोई मंज़िल
ना ही कोई रस्ता
जिस पर ऐसे ही 
चलती रहे ज़िंदगी|
ना ही कोई अपना
ना ही कोई पराया 
जिसे इस दर्द को करूं साझा|
ना ही कोई उम्मीद की किरण
ना ही कोई आखों में कोई ख़्वाब
जिसके लिये कुछ पल जियूँ|
कुछ है....तो बस!
ये तन्हा दिल
जो बार-बार करता है सवाल
खुद से...
जाएं भी तो कहाँ.......
जाएं भी तो कहाँ......

दर्द !

ये क्या आवारगी....लिख दी गयी हैबादलों की छत पर|  जब भी मेरा दिलउदास होता है, क़मबख्त बरस पड़ते हैं,मुझ पर ही..