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Friday, August 24, 2012

"ग़ज़ल "

बेरुखी में इस तरह ना ठुकराओ मुझे
चाहतों का मोम हूँ , पिघलाओ मुझे
धडकनों में नज़र आयेगी तस्वीर तुम्हारी
अपने दिल का आइना, बनाओ मुझे
बेरुखी में इस .....................................
समंदर,अश्कों का बन जायेगा एक पल में
तह -ऐ -दिल से अपने, रुलाओ मुझे
बेरुखी में इस .................................
गर खता है मेरी तुझसे इश्क करना
रूह-ऐ-नूर से पूछकर, बताओ मुझे

बेरुखी में इस ......................................
गिरा लूगां खुद को खुद की नज़र में
नज़र से नज़र मिलाकर, दिखाओ मुझे
बेरुखी में इस ................................

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