दिल -ए -चाहत न पूरा हो .तो कोई बात नही
दिल -ए -राहत न भी मिले तो कोई बात नही
गर इश्क हो तो सिर्फ तेरे रूह -ए - नूर का
वरना महरूम -ए इश्क रहूँ तो कोई बात नही
दिल -ए चाहत .........................................
फासले बढे तो मेरे और मेरी सासों के बीच
वरना जिन्दगी रहे या न रहे कोई बात नही
दिल -ए -चाहत .....................................
दिल -ए -राहत न भी मिले तो कोई बात नही
गर इश्क हो तो सिर्फ तेरे रूह -ए - नूर का
वरना महरूम -ए इश्क रहूँ तो कोई बात नही
दिल -ए चाहत .........................................
फासले बढे तो मेरे और मेरी सासों के बीच
वरना जिन्दगी रहे या न रहे कोई बात नही
दिल -ए -चाहत .....................................
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