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Sunday, July 29, 2012

ग़ज़ल

दिल -ए -चाहत न पूरा हो .तो कोई बात नही 
दिल -ए -राहत न भी मिले तो कोई बात नही 
गर इश्क हो तो सिर्फ तेरे रूह -ए - नूर का 
वरना महरूम -ए इश्क रहूँ तो कोई बात नही 
दिल -ए चाहत .........................................
फासले बढे तो मेरे और मेरी सासों के बीच 
वरना जिन्दगी रहे या न रहे कोई बात नही 
 दिल -ए -चाहत .....................................

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