prakritikiyadonme.blogspot.com

Friday, August 24, 2012

"विडम्बनाएँ "

कितनी विडम्बनाओं से भरा है
आदमी का मन
किसी की इच्छाएं है
सातवें आसमान पार पहुचने की
तो किसी के पग रहना चाहते है
सदैव धरा पर
कोई चाहता है
पी लूं आदमी का ही खून
रंज-ऐ -गम में
तो कोई लुटा देना चाहता है

जिंदगी ही अपनी
किसी के प्यार में
कितनी विडम्बनाओं से भरा है
आदमी का मन..........

No comments:

Post a Comment