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Wednesday, October 20, 2010

मेरे बचपन के

मेरे बचपन के
कुछ लम्हे
अभी भी
सुकून देते हैं
मुझे
कुछ नादानियाँ
अभी भी
बरक़रार है
जेहन में मेरे
जिनकी बदौलत
मुस्कुरा लेता हूँ
तमाम झंझावतों के बीच

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