गांवों में
सड़क के किनारे
बिज़ली के खम्भों पर
बैठे कबूतरों का झुण्ड
तरकुल के पेड़ पर
बैठे गिध्धों का झुण्ड
सिचाई के दौरान , खेतों के ऊपर
आसमान में उड़ते, बगुलों का झुण्ड
रेत - भरी धुल में , खेलते
गौरैया चिड़ियों की चहचहाहट
बरसात के मौसम में
मेढकों की टरटराहट
पीपल के पेड़ पर
रात के अन्धेरें में
जुगनुओं की जगमगाहट
और भी जाने कितने
अनुपम ,अद्वितीय मनभावन दृश्य
देखा करता था
तब नहीं था अनुमान
कि! ये सभी दृश्य
हो जायेगें विलुप्त , एक दिन
अन्यथा ! कैमरे में कैद कर
उतार लेता उनकी तस्वीर
और दिखाता
आने वाली पीढ़ियों को
कहता देखो
ज़रा गौर देखो
ये है तुम्हारा अतीत
जिसकी कीमत पर , दिया है तुझे
कभी न विलुप्त होने वाली
" प्लास्टिक की चिड़िया "
सड़क के किनारे
बिज़ली के खम्भों पर
बैठे कबूतरों का झुण्ड
तरकुल के पेड़ पर
बैठे गिध्धों का झुण्ड
सिचाई के दौरान , खेतों के ऊपर
आसमान में उड़ते, बगुलों का झुण्ड
रेत - भरी धुल में , खेलते
गौरैया चिड़ियों की चहचहाहट
बरसात के मौसम में
मेढकों की टरटराहट
पीपल के पेड़ पर
रात के अन्धेरें में
जुगनुओं की जगमगाहट
और भी जाने कितने
अनुपम ,अद्वितीय मनभावन दृश्य
देखा करता था
तब नहीं था अनुमान
कि! ये सभी दृश्य
हो जायेगें विलुप्त , एक दिन
अन्यथा ! कैमरे में कैद कर
उतार लेता उनकी तस्वीर
और दिखाता
आने वाली पीढ़ियों को
कहता देखो
ज़रा गौर देखो
ये है तुम्हारा अतीत
जिसकी कीमत पर , दिया है तुझे
कभी न विलुप्त होने वाली
" प्लास्टिक की चिड़िया "
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