तुम्हारे यादों के कुछ लम्हें
अभी भी मुझे बेचैन करते हैं
तुम्हारे मोहब्बत की खुशबू
अभी भी महकती है
मेरे दिल के फिजाओं में
तुम्हारे शरारतों के कुछ हसीन जख्म
अभी भी दर्द करते हैं
मेरे सीने में
तुम्हारे गीतों के झंकार
अभी भी गूंजते हैं
मेरे कानों में
अभी भी डर लगता है
कही भर न लो अपनी आगोश में
और मैं हो जाऊं घायल
तुम्हारी उन शोख अदाओं से
जिन पर मैं मरता था
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