इश्क की राहों में यूँ ही अकेला छोड़ दिया
इक रहम दिल को किसी ने तोड़ दिया
सीधी राहों से गुजरने की हुई थी तमन्ना
किसी ने हर इक राहों को मोड़ दिया
इश्क की राहों में यूँ ही अकेला छोड़ दिया
पत्थरों से बनाया था इश्क का जो महल
शीशे के टुकड़े से किसी ने तोड़ दिया
इश्क की राहों में यूँ ही अकेला छोड़ दिया
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सर्वेश त्रिपाठी
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इक रहम दिल को किसी ने तोड़ दिया
सीधी राहों से गुजरने की हुई थी तमन्ना
किसी ने हर इक राहों को मोड़ दिया
इश्क की राहों में यूँ ही अकेला छोड़ दिया
पत्थरों से बनाया था इश्क का जो महल
शीशे के टुकड़े से किसी ने तोड़ दिया
इश्क की राहों में यूँ ही अकेला छोड़ दिया
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सर्वेश त्रिपाठी
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