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Thursday, October 21, 2010

"अबे !छोटू "

isarvesh tripathi
हम भी करतें है
आवाज़ बुलंद
लगा देते हैं
तर्कों की झड़ी
सम्मेलनों ,संगोष्टियों में
बाल-मजदूरी के खिलाफ

किन्तु होते ही शाम
पहुंचतें हैं दोस्तों के साथ
जब किसी चाय की दूकान पर
तो कहना पड़ता है

"अबे !छोटू "
ज़रा चार चाय और
चार समोसे ला
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